50+ Popular Sanskrit Shlok With Hindi Meaning | संस्कृत श्लोक अर्थ सहित

 Popular Sanskrit Shlok with Hindi meaning – संस्कृत दुनिया का सबसे प्राचीन भाषा है, हम आपको बता दें संस्कृत भाषा में सबसे अधिक शब्द है और हाल ही में बहुत सारे बड़े इंस्टिट्यूट जैसे कि अमेरिका का कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी ने भी यह दावा किया है की संस्कृत भाषा आगे चलकर कंप्यूटर प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के लिए सबसे बढ़िया लैंग्वेज होने वाली है.

 संस्कृत भाषा आज  विलुप्त होने की और बहुत ही तेजी से बढ़ रहा है, आज संस्कृत भाषा का प्रयोग सिर्फ पूजा पाठ में ही किया जा रहा है, जबकि संस्कृत दुनिया का सबसे बढ़िया भाषा में से एक है, परंतु यह भाषा विलुप्त हो रहा है क्योंकि संस्कृत भाषा को हिंदुओं का भाषा माना जाता है और हिंदू अपने धर्म के प्रति कितना सजग नहीं है.

Sanskrit Shlok With Meaning in Hindi
Sanskrit Shlok With Hindi Meaning

 जैसे-जैसे लोग पश्चिमी संस्कृति की ओर आकर्षित हो रहे हैं वैसे वैसे भारतीय संस्कृति का विलुप्त हो रहा है और साथ में संस्कृत भाषा का भी विलुप्त हो रहा है, परंतु कुछ समय से भारतीय सरकार द्वारा एवं लोगों द्वारा संस्कृत भाषा को जीवंत रखने के लिए एक बढ़िया मुहीम चलाया गया है जिससे कि लोग संस्कृत भाषा की ओर अपना दिलचस्प बनाए और इस भाषा का भी अध्ययन  करें

 इसी सिलसिले में हम भी संस्कृत भाषा को जीवंत रखने के लिए एक मुहिम के तौर पर यह लेख लिखा है इसमें हमने संस्कृत भाषा के कुछ प्रसिद्ध एवं बेहतरीन  popular Sanskrit shlok with Hindi meaning श्लोक को लिखा है, अगर आप एक हिंदू है तो आपको इन  popular Sanskrit shlok with Hindi meaning को जरूर पढ़ना चाहिए एवं दूसरे लोगों को भी इन सभी लोगों के बारे में बताना चाहिए. 

List of Popular Sanskrit Shlok With hindi Meaning

दोस्तों यहां पर सबसे प्रसिद्ध  Popular Sanskrit shlok with meaning की एक लिस्ट लिखी गई है जिसे आप पढ़ सकते हैं हम आपको बता दें इस लिस्ट में आपको सभी प्रकार के सबसे प्रसिद्ध संस्कृत श्लोक लिखे गए हैं जिसमें आपको इन श्लोकों का हिंदी एवं अंग्रेजी अनुवाद भी दिया गया है ताकि आप अच्छे से पढ़े एवं इन श्लोक का अर्थ जान सके.

 हमारा मकसद बस आपको संस्कृत भाषा को आसान शब्दों में आपको सिखाना है, हो सकता है हमारे इस लेख में कुछ गलतियां हो जिसके लिए हम आपसे क्षमा भी मांगते हैं, परंतु हमने इस लेख में जो भी लिखा है वह 99% जरूर सही लिखा है.

 हम आपको बता दें दोस्तों संस्कृत एक ऐसा भाषा है जिसका पूर्णता अनुवाद आपको गूगल ट्रांसलेटर पर भी नहीं मिलेगी क्योंकि यह दुनिया के सबसे प्राचीन भाषा में से एक है एवं दुनिया का सबसे कठिन भाषा जी हम संस्कृत को कह सकते हैं. कुछ संस्कृत शब्दों का उच्चारण इतना मुश्किल होता है कि आप बिना अभ्यास के उन संस्कृत के शब्दों को भी नहीं पढ़ सकते हैं.

Shree Hanuman Chalisha path with hindi meaning pdf download


  • महामृत्युंजय मंत्र
    ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्व: भुव: भू: ॐ स: जूं हौं ॐ !!
Sanskrit Shlok with Hindi meaning
  • महामृत्युंजय मंत्र का अर्थ

ॐ- अनंत ,सच्चिदानंद 

त्रयंबकम- त्रि.नेत्रों वाला ;कर्मकारक।

यजामहे- हम पूजते हैं, सम्मान करते हैं। हमारे श्रद्देय।

सुगंधिम- हे शिव आपकी खुशबू पूरी ब्रह्मांड में फैली है।

पुष्टि- एक सुपोषित स्थिति, फलने वाला व्यक्ति। जीवन की परिपूर्णता

वर्धनम- वह जो पोषण करता है, शक्ति देता है।

उर्वारुक- पका हुआ फल।

इवत्र- जैसे, इस तरह।

बंधनात्र- वास्तव में समाप्ति से अधिक लंबी है।

मृत्यु- मृत्यु से

र्मुक्षीयहमें स्वतंत्र करें, मुक्ति दें।

मामृतात्अमरता, मोक्ष।

हिंदी अनुवाद: हे अनंत सच्चिदानंद ईश्वर, तीन नैनो  वाले कर्म कारक, हम आपकी पूजन करते हैं आप का सम्मान करते हैं, जय शिव आपकी सुगंध पूरी ब्रह्मांड में फैली है, हे जगत के पालन करता ,हमारे आत्मा के शक्ति दाता, हमें रोग दुख भय मुक्त करें उसी प्रकार जिस प्रकार पका हुआ फल पेड़ से झड़ जाते हैं, हम इस दुनिया की मोह माया से बंधे हैं हे भगवान शिव हमें इस माया के बंधन से मुक्त करें, और हमारे मन से अकाल मृत्यु के भय को खत्म करें और हमें भय मुक्त बनाएं !!!

English Translation: O Anant Satchidananda God, three eyes of karma, we worship you, respect you, Jai Shiva, your fragrance is spread in the whole universe, O sustainer of the world, the giver of our soul, free us from fear of disease and sorrow. Just as ripe fruits fall from the tree, we are bound by the illusion of this world, O Lord Shiva, free us from the bondage of this illusion, and eliminate the fear of premature death from our mind and make us free from fear! !!


Sanskrit Shlok with Hindi meaning

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।

मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥

(द्वितीय अध्याय, श्लोक 47)

हिंदी अनुवाद: कर्म पर ही तुम्हारा अधिकार है, लेकिन कर्म के फलों में कभी नहीं… इसलिए कर्म को फल के लिए मत करो और न ही काम करने में तुम्हारी आसक्ति हो।

English Translation: You have a right to perform your prescribed duties, but you are not entitled to the fruits of your actions. Never consider yourself to be the cause of the results of your activities, nor be attached to inaction.


Sanskrit Shlok with Hindi meaning

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यम भर्गो देवस्य धीमहि।

धियो यो नः प्रचोदयात॥

हिंदी अनुवाद : हम ईश्वर की महिमा का ध्यान करते हैं, जिसने इस संसार को उत्पन्न किया है, जो पूजनीय है, जो ज्ञान का भंडार है, जो पापों तथा अज्ञान की दूर करने वाला हैं- वह हमें प्रकाश दिखाए और हमें सत्य पथ पर ले जाए।

English Translation: We meditate on the glory of God, who has created this world, who is worshipable, who is the storehouse of knowledge, who is the remover of sins and ignorance – may he show us the light and lead us on the path of truth.


Sanskrit Shlok with Hindi meaning

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः ।

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु माकश्चिद्दुःख भाग्भवेत।।

हिंदी अनुवाद : सभी सुखी होवें, सभी रोगमुक्त रहें, सभी का जीवन मंगलमय बनें और कोई भी दुःख का भागी न बने। हे भगवन हमें ऐसा वरदान दो!

English Translation: May all be happy, May all be disease free, May everyone’s life be happy and May no one be a partaker of sorrow. O Lord, give us such a boon!


Sanskrit Shlok with Hindi meaning

गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरुर देवो महेश्वरः।

गुरुः साक्षात्परब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नमः।।

हिंदी अनुवाद : गुरु ही ब्रह्मा हैं, जो सृष्टि निर्माता की तरह परिवर्तन के चक्र को चलाते हैं। गुरु ही विष्णु अर्थात रक्षक हैं। गुरु ही शिव यानी विध्वंसक हैं, जो कष्टों से दूर कर मार्गदर्शन करते हैं। गुरु ही धरती पर साक्षात परम ब्रह्मा के रूप में अवतरित हैं। इसलिए, गुरु को सादर प्रणाम।

English Translation: Guru is Brahma, who, like the creator of the universe, drives the cycle of change. Guru is Vishnu i.e. protector. Guru is Shiva i.e. the destroyer, who guides us away from sufferings. Guru himself has incarnated on earth in the form of Supreme Brahma. So, Regards to the Guru.


Sanskrit Shlok with Hindi meaning

सर्वे क्षयान्ता निचयाः पतनान्ताः समुच्छ्रयाः।

संयोगा विप्रयोगान्ता मरणान्तं च जीवितम्।।

हिंदी अनुवाद : सभी प्रकार के संग्रह का अंत क्षय है। बहुत ऊंचे चढ़ने के अंत नीचे गिरना है। संयोग का अंत वियोग है और जीवन का अंत मरण है।

English Translation: The end of all collections is decay. The end of climbing too high is to fall. The end of coincidence is separation and the end of life is death.


ॐ गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वरः।

गुरुर्साक्षात परब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः।।

हिंदी अनुवाद :गुरु ही ब्रह्मा है, गुरु ही विष्णु है और गुरु ही भगवान शंकर है। गुरु ही साक्षात परब्रह्म है। ऐसे गुरु को मैं प्रणाम करता हूँ।

English Translation: Guru is Brahma, Guru is Vishnu and Guru is Lord Shankar. Guru is the real Parabrahman. I bow to such a guru.


काक चेष्टा, बको ध्यानं, स्वान निद्रा तथैव च।

अल्पहारी, गृहत्यागी, विद्यार्थी पंच लक्षणं।।

हिंदी अनुवाद : हर विद्यार्थी में हमेशा कौवे की तरह कुछ नया सीखाने की चेष्टा, एक बगुले की तरह एक्राग्रता और केन्द्रित ध्यान एक आहत में खुलने वाली कुते के समान नींद, गृहत्यागी और यहाँ पर अल्पाहारी का मतबल अपनी आवश्यकता के अनुसार खाने वाला जैसे पांच लक्षण होते है।

English Translation: In every student, always trying to learn something new like a crow, concentration and focused attention like a heron, sleep like a dog that opens in a hurt, home-abandonment and here the power of snack, eats according to his needs, there are five characteristics.


यत्र स्त्री यत्र कितवो बालो यत्रानुशासिता।

मज्जन्ति तेवशा राजन् नद्यामश्मप्लवा इव।।

हिंदी अनुवाद : जहां का शासन स्त्री, जुआरी और बालक के हाथ में होता है। वहां के लोग नदी में पत्थर की नाव में बैठने वालों की भांति विवश होकर विपत्ति के समुद्र में डूब जाते हैं।

English Translation: Where the rule is in the hands of the woman, the gambler and the child. The people there are compelled like those who sit in a stone boat in the river and drown in the sea of ​​calamity.


उपदेशो हि मूर्खाणां प्रकोपाय न शान्तये।

पयःपानं भुजंगानां केवलं विषवर्द्धनम्।।

हिंदी अनुवाद : मूर्खों को दिया हुआ उपदेश उनके क्रोध को बढ़ाता ही है शांत नहीं करता। जिस प्रकार साँपों को पिलाया हुआ दुध हमेशा उनका विष ही बढ़ाता है।

English Translation: The preaching given to fools only increases their anger, but does not pacify them. Just as milk fed to snakes always increases their venom.


माता शत्रुः पिता वैरी येन बालो न पाठितः।

न शोभते सभामध्ये हंसमध्ये बको यथा।।

हिंदी अनुवाद : जो माता पिता अपने बच्चो को शिक्षा से वंचित रखते हैं, ऐसे माँ बाप बच्चो के शत्रु के समान है। विद्वानों की सभा में अनपढ़ व्यक्ति कभी सम्मान नहीं पा सकता वह हंसो के बीच एक बगुले के सामान है।

English Translation: The parents who deprive their children of education, such parents are like the enemy of the children. An illiterate person can never get respect in the assembly of scholars, he is like a heron among swans.


Geeta Shlok In Sanskrit – Gita Sanskrit Shlok

दोस्तों गीता  सनातन धर्म का एक पवित्र पुस्तक है , जिसमें 13 अध्याय हैं और हजारों श्लोक लिखे गए हैं, जिसमें कि अगर आप सभी लोगों को पढ़ना चाहते हैं तो आपको इसमें बहुत समय लगेगा परंतु हमने यहां पर आपके लिए गीता में से सबसे प्रसिद्ध  श्लोक को आपके लिए लेकर आए हैं,

 दोस्तों हम आपको बता दें  आज गीता को विदेशों में भी अलग-अलग भाषाओं में अनुवाद करके बहुत अधिक पढ़ा जाता है अगर आप सनातन धर्म से हैं तो आपको भी गीता को अवश्य ही पढ़नी चाहिए हम आपको बता दें गीता दुनिया का सबसे बड़ा  मोटिवेशनल किताब है और यह मैं नहीं कह रहा हूं बल्कि विदेशों के विद्वान मानते हैं.

 दोस्तों यहां पर मैंने आपके लिए सबसे Geeta Shlok in Sanskrit with Hindi  meaning प्रसिद्ध है को लिखा है साथ में इन सभी श्लोकों का हिंदी एवं अंग्रेजी दोनों अनुवाद बिल्कुल आसान शब्दों में करके लिखा है ताकि आप इन महत्वपूर्ण एवं सबसे लोकप्रिय गीता श्लोक को पढ़ सके एवं इन श्लोकों को के बारे में जानकर अपने जीवन में प्रयुक्त परिवर्तन करके अपने जीवन को सुखद में बना सके.


Sanskrit Shlok with Hindi meaning

नैनं छिद्रन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावक: ।

न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुत ॥

(द्वितीय अध्याय, श्लोक 23)

हिंदी अनुवाद: आत्मा को न शस्त्र  भेद सकते हैं और न आग उन्हें जला सकती है।

यह न पानी से गीला होता है और न हवा से सूखता है

No weapons can pierce the soul, nor can fire burn them.

It is neither wet by water nor dried by air


कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।

मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥

(द्वितीय अध्याय, श्लोक 47)

हिंदी अनुवाद: कर्म पर ही तुम्हारा अधिकार है, लेकिन कर्म के फलों में कभी नहीं… इसलिए कर्म को फल के लिए मत करो और न ही काम करने में तुम्हारी आसक्ति हो।

English Translation:You have a right over the work itself, but never in the fruits of the action… so do not do the work for the fruit, nor do you have any attachment to the work.


ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते।

सङ्गात्संजायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते॥

(द्वितीय अध्याय, श्लोक 62)

हिंदी अनुवाद: जब मनुष्य वस्तुओं का ध्यान करता है, तो उसके प्रति आसक्ति उत्पन्न होती है।

आसक्ति से काम उत्पन्न होता है, काम से क्रोध उत्पन्न होता है।

English Translation:When a person meditates on things, attachment arises towards them.

From attachment arises lust, from lust arises anger.


Sanskrit Shlok with Hindi meaning

क्रोधाद्भवति संमोह: संमोहात्स्मृतिविभ्रम:।

स्मृतिभ्रंशाद्बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति॥

(द्वितीय अध्याय, श्लोक 63)

हिंदी अनुवाद: क्रोध से मोह होता है और मोह से स्मृति का मोह होता है।

स्मरण शक्ति के नष्ट होने से बुद्धि का नाश होता है।

English Translation:From anger leads to attachment and from attachment comes attachment to memory.

The loss of memory destroys the intellect.


Sanskrit Shlok with Hindi meaning

यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जन:।

स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते॥

(तृतीय अध्याय, श्लोक 21)

हिंदी अनुवाद: श्रेष्ठ पुरुष , जो सबसे अच्छा करता है, वही दूसरे आम इंसान करते हैं।

वह (श्रेष्ठ पुरुष) जो प्रमाण या उदाहरण प्रस्तुत करता है, समस्त मानव-समुदाय उसी का अनुसरण करने लग जाते हैं।

English Translation:The best man, who does the best, is what other common people do.

The one (superior man) who presents the evidence or example, the whole human community starts following him.


Sanskrit Shlok with Hindi meaning

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत:।

अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥

(चतुर्थ अध्याय, श्लोक 7)

हिंदी अनुवाद: जब भी भारत में धार्मिकता की हानि होती है।

अधर्म का वह उदय मैं अपने में ही रचता हूं।

English Translation:Whenever there is loss of righteousness in India.

I create that rise of unrighteousness within myself.


हतो वा प्राप्यसि स्वर्गम्, जित्वा वा भोक्ष्यसे महिम्।

तस्मात् उत्तिष्ठ कौन्तेय युद्धाय कृतनिश्चय:॥

(द्वितीय अध्याय, श्लोक 37)

हिंदी अनुवाद: यदि तुम युद्ध में वीरगति को प्राप्त होते हो तो तुम्हें स्वर्ग मिलेगा और यदि विजयी होते हो तो धरती का सुख को भोगोगे.. इसलिए उठो, हे कौन्तेय , और निश्चय करके युद्ध करो।

English Translation:If you attain martyrdom in battle, then you will get heaven and if you are victorious, you will enjoy the happiness of the earth. So get up, O Kaunteya, and fight with determination.


परित्राणाय साधूनाम् विनाशाय च दुष्कृताम्।

धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे-युगे॥

(चतुर्थ अध्याय, श्लोक 8)

हिंदी अनुवाद:  धर्मी का उद्धार करना और दुष्कर्मियों का नाश करना।

मैं धर्म की स्थापना के लिए हर युग में प्रकट होता हूँ

English Translation: To deliver the righteous and destroy the wicked.

I appear in every age to establish religion


श्रद्धावान्ल्लभते ज्ञानं तत्पर: संयतेन्द्रिय:।

ज्ञानं लब्ध्वा परां शान्तिमचिरेणाधिगच्छति॥

(चतुर्थ अध्याय, श्लोक 39)

हिंदी अनुवाद: श्रद्धा रखने वाले मनुष्य, अपनी इन्द्रियों पर संयम रखने वाले मनुष्य, साधनपारायण हो अपनी तत्परता से ज्ञान प्राप्त कते हैं, फिर ज्ञान मिल जाने पर जल्द ही परम-शान्ति (भगवत्प्राप्तिरूप परम शान्ति) को प्राप्त होते हैं।

English Translation: Those who have faith, those who have control over their senses, being instrumental, acquire knowledge by their own readiness, then upon attaining knowledge, they soon attain supreme peace (the supreme peace in the form of attainment of God).


उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत्।

आत्मैव ह्रात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मन:॥

(षष्ठ अध्याय, श्लोक 5)

हिंदी अनुवाद:  अपने द्वारा अपना संसार समुद्र से उद्धार करे और अपने को अधोगति में न डाले, क्योंकि यह मनुष्य आप ही तो अपना मित्र है और आप ही अपना शत्रु है ।

English Translation: Save your world from the sea by yourselves and do not put yourself in degradation, for this man himself is his friend and himself is his enemy.


पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति।

तदहं भक्त्युपहृतमश्नामि प्रयतात्मन:॥

(नवम अध्याय, श्लोक 26)

हिंदी अनुवाद: जो कोई भक्त मेरे लिये प्रेम से पत्र (पत्ती), पुष्प, फल, जल आदि अर्पण करता है, उस शुद्ध बुद्धि निष्काम प्रेमी भक्त का प्रेमपूर्वक अर्पण किया हुआ वह पत्र-पुष्पादि मैं सगुण रूप से प्रकट होकर प्रीति सहित खाता हूँ।

English Translation: Whosoever devotee who lovingly offers leaves, flowers, fruits, water etc. to Me, I eat with love the leaf-pushpadi offered with love to that pure intellect and a selfless loving devotee.


यस्मान्नोद्विजते लोको लोकान्नोद्विजते च य: ।

हर्षामर्षभयोद्वेगैर्मुक्तो य: स च मे प्रिय:॥

(द्वादश अध्याय, श्लोक 15)

हिंदी अनुवाद: जिससे किसी को कष्ट नहीं पहुँचता तथा जो अन्य किसी के द्वारा विचलित नहीं होता, जो सुख-दुख में, भय तथा चिन्ता में समभाव रहता है, वह मुझे अत्यन्त प्रिय है।

English Translation: One who does not harm anyone and who is not disturbed by others, who is equanimous in happiness and sorrow, in fear and worry, he is very dear to me.


सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।

अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुच:॥

(अष्टादश अध्याय, श्लोक 66)

हिंदी अनुवाद:  सभी धर्मो को छोड़कर मेरी शरण में आ जाओ. में तुम्हे सभी पापो से मुक्त कर दूंगा, इसमें कोई संदेह नहीं हैं।

English Translation: Leave all religions and take refuge in me. I will free you from all sins, there is no doubt about it.


Sanskrit Shlok On Karm- Sanskrit Shlok Image


सन्यासस्तु महाबाहो दुःखमाप्तुमयोगत:

योगयुक्तो मुनिब्रह्म नचिरेणाधीगच्छति!!!

हिंदी अनुवाद: भक्ति में लगे बिना केवल समस्त कर्मो का परित्याग करने से कोई सुखी नहीं बन सकता परन्तु भक्ति में लगा हुआ विचारवान व्यक्ति शीघ्र ही परमेश्वर को प्राप्त कर लेता हैं!!!

English Translation:Without being engaged in devotion, one cannot become happy by simply renouncing all actions, but a thoughtful person engaged in devotion soon attains the Supreme Lord.


तत्कर्म यत्र बंधाय सा विद्या सा विमुक्तये

आयासायापर कर्म विद्यानय शिल्पनैपुणम्!!!

हिंदी अनुवाद: कर्म वही हैं जो बंधन का कारण न हो और विद्या भी वही हैं जो मुक्ति की साधिका हो इसके अतिरिक्त और कर्म तो परिश्रमरूप तथा अन्य विधाय कला कौशल मात्र ही हैं

English Translation: Karma is the one which is not the cause of bondage and knowledge is also the same which is the seeker of liberation, besides this, other works are only the form of hard work and other arts and skills.


सर्व कर्मवश वयम:!!!

हिंदी अनुवाद:  सब कर्म के ही अधीन हैं!!!

English Translation: All are subject to karma.


मन एव मनुष्याणां कारण बंधमोक्षयो:!!!

हिंदी अनुवाद:  मन ही मनुष्य के बंधन और मोक्ष का कारण हैं!!!

English Translation: Mind is the cause of man’s bondage and salvation.


योगयुक्तो विशुद्धात्मा विजितात्मा जितेंद्रिय सर्वभुआत्माभुआत्मा कुर्वन्नपि न लीपलयते!!!

हिंदी अनुवाद: जो भक्तिभाव से कर्म करता हैं जो विशुद्ध आत्मा हैं,और अपने मन तथा इंद्रियों को वश में रखता हैं वह सभी को प्रिय होता हैं और सभी लोग उसे प्रिय होते हैं,ऐसा व्यक्ति कर्म करता हुआ भी कर्म नहीं बंधता हैं!!

English Translation: One who acts with devotion, who is a pure soul, and who controls his mind and senses, he is dear to all and everyone is dear to him, such a person is not bound by karma even while doing action.


अतितृष्णा न कर्तव्या तृष्णा नैव परित्यजेते

शनै: शनैश्व भोक्तव्य स्वयं वित्तमुपार्जितम्!!!

हिंदी अनुवाद: अत्यधिक इच्छाएं नहीं करनी चाहिये पर इच्छाओं का सर्वथा त्याग भी नही करना चाहिए अपने कमाए हुए धन का धीरे धीरे उपभोग करना चाहिये!!

English Translation: One should not have excessive desires, but should not give up desires completely, one should consume the money earned slowly.


कर्मफल यदाचरित कल्याणी शुभ वा यदि वांशुभम

तदवे लभते भद्रे कर्ता कर्मजमातमन:!!!

हिंदी अनुवाद: मनुष्य जैसा भी अच्छा या बुरा कर्म करता हैं उसे वैसा ही फल मिलता हैं कर्ता को कर्म अपने कर्म का फल अवश्य भोगना पड़ता हैं!!!

English Translation: Whatever good or bad deed a man does, he gets the same result, the doer must bear the fruits of his karma.


दुर्जन: परिहर्तव्यों विद्यालकृतो सन

मणिना भूषितो सर्प: किमसो न भयंकर:!!!

हिंदी अनुवाद: दुष्ट व्यक्ति यदि विद्या से सुशोभित भी हो अर्थात वह विद्यावानभि हो तो भी उसका परित्याग कर देना चाहिए जैसे मणि से सुशोभित सर्प क्या भयंकर नहीं होता!!

English Translation: Even if a wicked person is adorned with knowledge, that is, he is also learned, he should be abandoned like a serpent adorned with gems is not terrible.


#लोका: समस्ता: सुखिनो भवन्तु!!!

हिंदी अनुवाद: सारा सँसार सुखी रहे!!!

English Translation: May the whole world be happy


अवष्यकर्णीय च मा त्वा कालोअत्यागदयंम

हिंदी अनुवाद: जो कर्म अवश्य करना हैं उसे कर डालो समय बीत न जाये!!

English Translation: Do whatever you have to do, don’t waste time


Sanskrit Shlok on Karm With Meaning in Hindi


सन्यास: कर्मयोगश्व नि: श्रेयसकरावुभौ

तयोस्तु कर्म सन्यासात्कर्मयोगो विशिष्यते!!

मुक्ति के लिए तो कर्म का परित्याग तथा भक्तिमय-कर्म दोनों ही उत्तम हैं किन्तु इन दोनों में से कर्म के परित्याग से भक्तियुक्त कर्म श्रेष्ठ हैं!!

For liberation, both renunciation of action and devotional-action are best, but out of these, devotional action is better than renunciation of action.


स्तु संचरते देशान् यस्तु सेवते पंडितान

तस्य विस्तारित बुद्धिस्टेलेबिंदुरिवंभासि!!!

भिन्न देशों में यात्रा करने वाले और विदद्वानो के साथ संबंध रखने वाले व्यक्ति की बुद्धि उसी तरह बढ़ती हैं जैसे तेल की एक बून्द पानी मे फैलती हैं!!

The intellect of a person traveling in different countries and having relations with scholars increases in the same way as a drop of oil spreads in water.


संयोजयति विद्यैव नीचगापि नरं सरित् ।

समुद्रमिव दुर्धर्षं नृपं भाग्यमतः परम् ॥

जैसे नीचे प्रवाह में बहेनेवाली नदी, नाव में बैठे हुए इन्सान को न पहुँच पानेवाले समंदर तक पहुँचाती है, वैसे हि निम्न जाति में गयी हुई विद्या भी, उस इन्सान को राजा का समागम करा देती है; और राजा का समागम होने के बाद उसका भाग्य खील उठता है ।

जैसे नीचे प्रवाह में बहेनेवाली नदी, नाव में बैठे हुए इन्सान को न पहुँच पानेवाले समंदर तक पहुँचाती है, वैसे हि निम्न जाति में गयी हुई विद्या भी, उस इन्सान को राजा का समागम करा देती है; और राजा का समागम होने के बाद उसका भाग्य खील उठता है


सुखार्थिनः कुतोविद्या नास्ति विद्यार्थिनः सुखम् ।

सुखार्थी वा त्यजेद् विद्यां विद्यार्थी वा त्यजेत् सुखम् ॥

अर्थात:- जिसे सुख की अभिलाषा हो (कष्ट उठाना न हो) उसे विद्या कहाँ से ? और विद्यार्थी को सुख कहाँ से ? सुख की ईच्छा रखनेवाले को विद्या की आशा छोडनी चाहिए, और विद्यार्थी को सुख की ।

Where does the one who has the desire for happiness (not to suffer suffering) get his knowledge? And where does the student get happiness? The one who desires happiness should give up hope of learning, and the student of happiness.


पुस्तकस्या तु या विद्या परहस्तगतं धनं ।

कार्यकाले समुत्पन्ने न सा विद्या न तद्धनम् ॥

अर्थात:- जो विद्या पुस्तक में है और जो धन किसी को दिया हुआ है.  जरूरत पड़ने पर न तो वह विद्या काम आती है और न वह धन.

Which is in the book of knowledge and the money which is given to someone. Neither that knowledge nor that money is useful when needed.


विद्या रूपं कुरूपाणां क्षमा रूपं तपस्विनाम् ।

कोकिलानां स्वरो रूपं स्त्रीणां रूपं पतिव्रतम् ॥

कुरुप का रुप विद्या है, तपस्वी का रुप क्षमा, कोकिला का रुप स्वर, तथा स्त्री का रुप पातिव्रत्य है ।

The form of ugly is knowledge, the form of ascetic is forgiveness, the form of nightingale is voice, and the form of woman is chastity.


भूमे:गरीयसी माता,स्वर्गात उच्चतर:पिता।

जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गात अपि गरीयसी।।

अर्थ – भूमि से श्रेष्ठ माता है, स्वर्ग से ऊंचे पिता हैं। माता और मातृभूमि स्वर्ग से भी श्रेष्ठ हैं।

There is a mother higher than the earth, a father higher than the heaven. Mother and motherland are better than heaven


अष्टादस पुराणेषु व्यासस्य वचनं द्वयम्।

परोपकारः पुण्याय पापाय परपीडनम्।।

अठारह पुराणों में व्यास के दो वचन ही है। पहला परोपकार ही पुण्य है और दूसरा औरों को दुःख पहुंचाना पाप है।

There are only two words of Vyasa in the eighteen Puranas. First benevolence is virtue and secondly, causing misery to others is sin.


यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवताः।

यत्र तास्तु न पूज्यंते तत्र सर्वाफलक्रियाः।।

जहाँ पर हर नारी की पूजा होती है वहां पर देवता भी निवास करते हैं और जहाँ पर नारी की पूजा नहीं होती, वहां पर सभी काम करना व्यर्थ है।

Where every woman is worshiped, the gods also reside there and where women are not worshipped, all work is in vain.


अलसस्य कुतः विद्या अविद्यस्य कुतः धनम्।

अधनस्य कुतः मित्रम् अमित्रस्य कुतः सुखम्।।

आलसी व्यक्ति को विद्या कहां, मुर्ख और अनपढ़ और निर्धन व्यक्ति को मित्र कहां, अमित्र को सुख कहां।

Where is knowledge to the lazy person, where is the friend to the foolish and illiterate and the poor, where is the happiness to the unfriendly.


Disclaimer

यह पोस्ट सिर्फ और सिर्फ ज्ञान बढ़ाने का पर्पस से लिखा जा रहा है। यहाँ अगर किसी संस्कृत श्लोक का अर्थ में किसी प्रकार के थोड़ी बहुत गलती हुई हो। तो आप इसके लिए तो पहले हमें क्षमा कर दे। और उसके साथ ही आप हमें उन अर्थ को हमारे Gmail पर भेज दे। ताकि हम उन्हें सुधार सके।

धन्यवाद😄🙏😄

1 thought on “50+ Popular Sanskrit Shlok With Hindi Meaning | संस्कृत श्लोक अर्थ सहित”

Leave a Comment